इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी का भगवान शिव से गहरा और अलौकिक संबंध माना जाता है। कहा जाता है कि काशी स्वयं महादेव के त्रिशूल पर विराजमान है और हर संकट से उसकी रक्षा भोलेनाथ करते हैं। इसी पावन नगरी में एक ऐसा अनोखा मंदिर स्थित है, जहां अजन्मे भगवान शिव के पिता के दर्शन होते हैं।
काशी में स्थित पिता महेश्वर मंदिर अपनी अद्भुत मान्यताओं और रहस्यमयी स्वरूप के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव अनादि और अजन्मे हैं, फिर भी इस मंदिर में उनके पिता स्वरूप शिवलिंग ‘पिता महेश्वर’ की पूजा की जाती है। यही नहीं, यहां भगवान शिव के दादा का भी प्रतीकात्मक अस्तित्व बताया जाता है, जो इस मंदिर को और भी विलक्षण बनाता है।
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां शिवलिंग के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होते। भक्त एक छोटे से छिद्र के माध्यम से ही पिता महेश्वर के दर्शन करते हैं। मान्यता है कि यह दर्शन अत्यंत पुण्यदायी होता है और वंश वृद्धि, पितृ दोष निवारण व पारिवारिक सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देता है।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार पिता महेश्वर मंदिर में दर्शन का अवसर साल में केवल एक बार ही मिलता है। उस विशेष दिन दूर-दूर से श्रद्धालु काशी पहुंचते हैं और दर्शन के लिए घंटों इंतजार करते हैं। आस्था, रहस्य और पुराणों की गूढ़ कथाओं से जुड़ा यह मंदिर काशी की आध्यात्मिक पहचान को और भी मजबूत करता है।







