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आपके द्वारा भेजी गई सामग्री को समाचार पत्र/पत्रिका के लिए उपयुक्त प्रेस नोट शैली में थोड़ा व्यवस्थित करके इस प्रकार लिखा जा सकता है:

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सेवा में माननीय महोदय, प्रस्तुत पत्र के साथ निम्नलिखित सामग्री प्रेषित की जा रही है— आपसे विनम्र निवेदन है कि कृपया इसे अपने प्रतिष्ठित समाचार पत्र/पत्रिका/मैगजीन/ऑनलाइन पोर्टल…

सेवा में

माननीय महोदय,

प्रस्तुत पत्र के साथ निम्नलिखित सामग्री प्रेषित की जा रही है—

आपसे विनम्र निवेदन है कि कृपया इसे अपने प्रतिष्ठित समाचार पत्र/पत्रिका/मैगजीन/ऑनलाइन पोर्टल में प्रकाशित करने की कृपा करें। लेख अथवा कविता के संक्षिप्तीकरण के लिए आप स्वतंत्र हैं।

हमें विश्वास है कि AVK News Service को आपका सहयोग आगे भी मिलता रहेगा। एवीके न्यूज सर्विस की सामग्री वेबसाइट
पर भी उपलब्ध है।

“इंकलाब लिख दिया जिसने अपने खून से…”

दहक उठी थी ज्वाला मन में,
जब देश गुलामी में जकड़ा था,
नन्हीं आंखों ने जलियांवाला बाग हत्याकांड का
वो खूनी मंजर पकड़ा था।

मिट्टी को माथे से लगाकर
उसने कसम ये खाई थी,
गोरी सत्ता को उखाड़ने की
उसने अलख जगाई थी।

वह डरा नहीं फांसी के फंदों से,
न बेड़ियों की झंकार से,
वो गूंज उठा था इंकलाब बन
असेंबली की दीवार से।

अगर चाहें तो मैं इस कविता को शहीद भगत सिंह पर आधारित पूरी 20–25 पंक्तियों की विस्तृत देशभक्ति कविता के रूप में भी आगे बढ़ाकर दे सकता हूँ, जो अखबार या पत्रिका में और प्रभावशाली लगेगी।

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