इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले में स्थित उनामंचेरी कोदंडरामा स्वामी मंदिर अपनी अनोखी धार्मिक मान्यताओं और दुर्लभ प्रतिमाओं के कारण विशेष पहचान रखता है. तांबरम के पास स्थित यह प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण अच्युत वर्मा राय ने भगवान के स्वप्न में दर्शन के बाद कराया था.
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता गर्भगृह में विराजमान दो मुखी हनुमान जी की दुर्लभ प्रतिमा है. कहा जाता है कि ऐसी प्रतिमा दुनिया के किसी अन्य मंदिर में देखने को नहीं मिलती. दोनों मुखों का अलग-अलग महत्व बताया जाता है—एक मुख शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है, जबकि दूसरा मुख रोगों और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां दर्शन मात्र से पुराने से पुराने शारीरिक कष्ट दूर हो जाते हैं.
मंदिर की एक और अनोखी बात यह है कि यहां भगवान श्रीराम अपने तीनों भाइयों—लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न—के साथ गर्भगृह में विराजमान हैं, और चारों भ्राता हाथ जोड़कर नमस्कार मुद्रा में दिखाई देते हैं, जो कहीं और देखने को नहीं मिलता. मां सीता भी श्रीराम के साथ विराजमान हैं.
भव्य गोपुरम, शांत वातावरण और दिव्य ऊर्जा से परिपूर्ण यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक शांति की तलाश करने वालों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. यही वजह है कि दूर-दूर से भक्त इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं.







