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ईरान पर अमेरिका के संभावित हमले का खतरा फिलहाल टल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए थे कि वे ईरान पर कड़ी कार्रवाई करने वाले हैं। लेकिन अचानक उनके सुर नरम पड़ गए और उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी नहीं देगा।
सूत्रों के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे 48 घंटे में चली पर्दे के पीछे की कूटनीति है। सऊदी अरब, कतर, ओमान और मिस्र ने अमेरिका और ईरान दोनों के साथ लगातार बातचीत की और युद्ध को टालने में निर्णायक भूमिका निभाई।
एक गल्फ अधिकारी ने बताया कि इन चार देशों की फोन लाइनें वाशिंगटन और तेहरान के बीच लगातार सक्रिय रहीं। उन्होंने ट्रंप प्रशासन को यह समझाया कि हमला करना कितना जोखिमपूर्ण और विनाशकारी साबित हो सकता है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब, कतर और ओमान ने वॉशिंगटन में लॉबिंग की और फिलहाल अमेरिकी हमले की योजना पर रोक लगाई। इस समन्वित प्रयास ने ईरान और अमेरिका दोनों को युद्ध से दूर रखा।
विश्लेषकों के मुताबिक, यह घटना दिखाती है कि कूटनीति कितनी तेजी से बड़े संकट को टाल सकती है और क्षेत्रीय देशों की सक्रिय भूमिका शांति बनाए रखने में अहम हो सकती है।