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उत्तर प्रदेश : VIVO मोबाइल का कारनामा, एक IMEI नंबर पर 13000 से ज्यादा मोबाइल फ़ोन जारी, मेरठ में FIR दर्ज

vinay motiani5 मिनट में पढ़ें

आज की दिल्ली / इंडियन न्यूज़ ऑनलाइन :

मेरठ/दिल्ली : चीन की मोबाइल कंपनी VIVO का कारनामा देखिये, कहीं आपका मोबाइल वीवो का तो नहीं ? आप भी चेक कर लेजेइए आपका मोबाइल का आइएमईआइ (IMEI) नंबर मैच कर रहा है या नहीं जो बॉक्स आपको दिया गया है और मोबाइल में जो लिखा हुआ है उसमें अंतर तो नहीं है न ?
मेरठ में इस कंपनी के खिलाफ मुक़दमा दर्ज हुआ है.
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण के सूत्रधार चीन का फर्जीवाड़ा मोबाइल में भी आने लग गया है अब। बाजार में लुभावने विज्ञापन, रंगीन डिजाइन वाले बोर्ड लगाकर ग्राहकों को लुभाया फिर उसका फायदा उठाया। अब उसकी एक बड़ी मोबाइल कंपनी ने भारत की आतंरिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया है ! इस प्रकरण में मोबाइल कंपनी के खिलाफ मेरठ में केस दर्ज किया गया है ।
चीन की एक बड़ी मोबाइल कंपनी VIVO ने भारत में एक ही आइएमईआइ (IMEI) नम्बर के हजारों मोबाइल फोन बाजार में उतारें हैं । पुलिस केन्द्र शासित प्रदेशों और देश के 28 राज्यों में जगह-जगह एक ही आइएमईआइ नंबर पर कई मोबाइल फोन सक्रिय होने के प्रमाण पुलिस जुटा चुकी है ।उत्तर प्रदेश में एक ही आइएमईआइ नंबर पर सक्रिय मोबाइल फोन की संख्या सबसे ज्यादा है । पुलिस ने नेटवर्किंग कंपनियों व मोबाइल निर्माता वीवो को नोटिस जारी कर तमाम दस्तावेज तलब किए हैं ।
दुनिया में हर मोबाइल फोन में आइएमईआइ यानी इंटरनेशनल मोबाइल इक्यूपमेंट आईडेंटी नम्बर होता है । यह एक तरह से मोबाइल की पहचान है । कोई भी कंपनी एक मोबाइल को एक आईएमईआई देती है । इसको धता बता चीन की मोबाइल कंपनी ने देशभर में प्रयोग में आ रहे करीब 13 हजार 500 से अधिक मोबाइल को एक आइएमईआइ नम्बर के साथ बाजार में उतारा है । भारत में एक ही आइएमईआइ नम्बर के 13 हजार से अधिक मोबाइल फोन का मामला सामने आने पर मेरठ के पुलिस विभाग में खलबली मच गई । गंभीर प्रकरण पर मेरठ में अब चीन की मोबाइल कंपनी वीवो के खिलाफ केस दर्ज किया गया । यह हम नहीं कर रहे हैं मेरठ पुलिस ने इसका खुलाशा किया है. मेरठ जोन पुलिस की साइबर क्राइम सेल की जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है । चीन की वीवो कंपनी व उसके सर्विस सेंटर के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर मेरठ की मेडिकल थाना पुलिस ने जांच-पड़ताल शुरू कर दी है । भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से वीवो कंपनी की यह भारी चूक मानी जा रही है ।

पुलिस अधिकारी का मोबाइल ख़राब न होता तो यह पता भी नहीं चलता. दरअसल, अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ के कार्यालय में तैनात सब इंस्पेक्टर आशाराम के पास वीवो कंपनी का मोबाइल है । स्क्रीन टूटने पर उन्होंने इसको बदलने के लिए 24 सितंबर 2019 को मेरठ में दिल्ली रोड के वीवो के सर्विस सेंटर पर दिया । बैट्री, स्क्रीन और एफएम बदलकर सर्विस सेंटर ने उन्हेंं मोबाइल दे दिया । इसके कुछ दिन बाद ही मोबाइल में डिस्प्ले पर एरर आना शुरू हो गया ।
इसके बाद मामले की शिकायत होने पर तत्कालीन एडीजी प्रशांत कुमार ने मेरठ जोन पुलिस की साइबर क्राइम सेल प्रभारी प्रबल कुमार पंकज व साइबर एक्सपटर्स विजय कुमार को जांच के निर्देश दिया । इनकी जांच में बता चला कि आशाराम के मोबाइल के बॉक्स पर जो आइएमईआइ लिखा हुआ है, वह वर्तमान में मोबाइल में मौजूद आइएमईआइ से अलग है । इसके बाद 16 जनवरी 2020 को सॢवस सेंटर मैनेजर ने जवाब दिया कि आइएमईआइ नहीं बदली गई ।

इसके बाद प्रकरण गंभीर होने पर साइबर सेल ने मोबाइल में जिओ कंपनी का सिम मिलने पर उस आइएमईआइ को टेलीकॉम कंपनी को भेजकर डाटा मांगा । वहां से रिपोर्ट आई तो अधिकारियों को हैरान कर देने वाली बात पता लगी। 24 सितंबर 2019 को सुबह 11:00 से 11:30 बजे तक अलग-अलग राज्यों के वीवो मोबाइल के इसी आइएमईआइ नम्बर पर 13557 फोन चल रहे हैं । मतलब 13 हजार पांच सौ सतावन फ़ोन चल रहे थे।
ADG मेरठ राजीव सबरवाल ने बताया कि एक शिकायत पर इस केस में जांच हुई । पता चला कि वीवो मोबाइल कंपनी के एक आइएमईआइ नम्बर पर कई हजार मोबाइल चल रहे हैं । यह नियमों का उल्लंघन के साथ देश की सुरक्षा के लिहाज से भी खतरा है । उस आइएमईआइ वाले मोबाइल से कोई अपराध हुआ तो हम अपराधी को पकड़ भी नहीं पाएंगे । इस मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया है । कंपनी से बात होगी कि यह कैसे हुआ । क्या यह टेक्नीकल फाल्ट है या फिर जानबूझ कर किया गया है. जो भी निकल है यह गंभीर मामला है।

एडीजी राजीव सबरवाल के अनुसार, कुछ वर्षों पहले जब चाइनीज फोन आए थे तब उनका आइएमईआइ नंबर एक ही होता था । सुरक्षा के लिहाज से यह खतरा था । भारत सरकार ने सभी नंबरों को ब्लैक लिस्ट किया था । इसके बाद ट्राई के नियम लागू हुए । इसके तहत एक आईएमईआई सिर्फ एक मोबाइल को दिया जा सकता है। उसके बाद सभी कंपनियां एक मोबाइल पर एक आइएमईआइ नंबर देती है।
इस सारे प्रकरण के बाद इस सम्बन्ध में कंपनी के नोडल अधिकारी को नोटिस भेजा गया । मेरठ साइबर सेल ने पूरे मामले में वीवो इंडिया के नोडल अधिकारी हरमनजीत सिंह को 91 सीआरपीसी के तहत नोटिस दिया । नोटिस के जवाब से पुलिस संतुष्ट नहीं हुई । वह यह भी नहीं बता पाए कि ट्राई के किस नियम के अनुसार एक आइएमईआइ एक से ज्यादा मोबाइल नंबर पर सक्रिय है । साइबर सेल ने माना है कि इस मामले में मोबाइल कंपनी की घोर लापरवाही और ट्राई के नियमों का उल्लंघन है । इसलिए इस मामले में मुकदमा कायम किया गया है।



-मनोज रौतेला की रिपोर्ट

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