इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


हिंदू धर्म में भगवान शिव को संहार और कल्याण का देवता माना जाता है। जब-जब सृष्टि में अधर्म बढ़ा और संतुलन बिगड़ा, तब भगवान शिव ने अपने उग्र स्वरूपों को प्रकट किया। इन्हीं स्वरूपों को एकादश रुद्र यानी शिव के 11 रुद्र कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, ये रुद्र ऋषि कश्यप और उनकी पत्नी सुरभि के गर्भ से उत्पन्न हुए थे, जबकि कुछ मान्यताओं में इन्हें भगवान ब्रह्मा के क्रोध से उत्पन्न माना गया है।
शिव पुराण में वर्णित 11 रुद्रों के नाम हैं— कपाली, पिंगल, भीम, विरूपाक्ष, विलोहित, अजकपाद, अहिर्बुध्न्य, शंभु, चण्ड, भव और ईशान। इन रुद्रों को भगवान शिव के सबसे उग्र और शक्तिशाली रूप माना जाता है, जो अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्र केवल विनाश के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये दुख दूर करने वाले और सुख प्रदान करने वाले भी माने जाते हैं। इनकी पूजा करने से भय, रोग, मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत और सोमवार के दिन रुद्रों की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है।
मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से शिव के 11 रुद्रों की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में शांति व समृद्धि आती है। यही कारण है कि एकादश रुद्रों का उल्लेख भारतीय धर्म और संस्कृति में विशेष स्थान रखता है।







