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कौन हैं सप्तऋषि? ब्रह्मांड के सात दिव्य गुरु और धर्म के शाश्वत मार्गदर्शक

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

हिंदू धर्म में “सप्तऋषि” उन सात महर्षियों को कहा जाता है, जिन्होंने सृष्टि, धर्म और ज्ञान की परंपरा को दिशा दी। पुराणों और वैदिक ग्रंथों के अनुसार ये ब्रह्मा की मानसिक संतान माने जाते हैं और इन्हें ब्रह्मांड के दिव्य गुरु कहा जाता है। वर्तमान मन्वंतर में जिन सात ऋषियों का उल्लेख मिलता है, वे हैं— कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज।

प्तऋषियों का महत्वकश्यप ऋषि: सृष्टि के विस्तार में उनकी प्रमुख भूमिका मानी जाती है। अनेक देव, दानव और मानव वंश उनके माध्यम से उत्पन्न हुए बताए जाते हैं।

  • अत्रि ऋषि: तप और ध्यान के लिए प्रसिद्ध, दत्तात्रेय जैसे अवतार से उनका संबंध जोड़ा जाता है।

  • वशिष्ठ ऋषि: राजा दशरथ के कुलगुरु और मर्यादा पुरुषोत्तम राम के मार्गदर्शक के रूप में विख्यात।

  • विश्वामित्र ऋषि: पहले क्षत्रिय, बाद में तप से ब्रह्मर्षि बने; गायत्री मंत्र से उनका गहरा संबंध माना जाता है।

  • गौतम ऋषि: न्याय और धर्म के सिद्धांतों के प्रवर्तक माने जाते हैं।

  • जमदग्नि ऋषि: भगवान परशुराम के पिता, कठोर तपस्या के लिए प्रसिद्ध।

  • भारद्वाज ऋषि: आयुर्वेद और युद्धविद्या सहित कई विद्याओं के आचार्य माने जाते हैं।

आकाश में सप्तऋषि मंडल (Ursa Major) को भी इन्हीं सात ऋषियों का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ये ऋषि आज भी सूक्ष्म रूप में सृष्टि का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

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