इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


देवताओं के गुरु बृहस्पति ग्रह 30 जनवरी 2026 को वक्री चाल से अपने ही नक्षत्र पुनर्वसु में प्रवेश कर चुके हैं। खास बात यह है कि पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी स्वयं गुरु बृहस्पति ही हैं, इसलिए इस गोचर को ज्योतिष शास्त्र में बेहद शुभ और प्रभावशाली माना जा रहा है। गुरु ग्रह इस नक्षत्र में 20 अप्रैल 2026 तक स्थित रहेंगे। इस दौरान मेष से मीन तक सभी 12 राशियों पर प्रभाव पड़ेगा, लेकिन ज्योतिषियों के अनुसार 4 राशियों के लिए यह गोचर विशेष रूप से भाग्यशाली साबित होने वाला है।
वैदिक ज्योतिष में गुरु ग्रह को ज्ञान, शिक्षा, धन, भाग्य, धर्म और समृद्धि का कारक माना जाता है। जब गुरु मजबूत स्थिति में होते हैं, तब व्यक्ति के जीवन में तरक्की, स्थिरता और सुख-समृद्धि आती है, वहीं कमजोर स्थिति में कई तरह की परेशानियां घेर लेती हैं। अपने ही नक्षत्र में गुरु का गोचर इन राशियों के लिए भाग्य परिवर्तन योग बना रहा है।







