इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


नई दिल्ली। माघ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर मनाई जाने वाली गणेश जयंती इस वर्ष विशेष संयोगों और चुनौतियों के साथ आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह तिथि विघ्नहर्ता भगवान गणेश के प्राकट्य का पर्व है, जिसे देशभर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है। हालांकि इस बार इस पावन तिथि पर भद्रा का साया भी रहेगा, जिससे श्रद्धालुओं को पूजा के लिए सही समय चुनने में सतर्क रहना होगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार चतुर्थी तिथि में रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य और आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। लेकिन दोपहर के बाद भद्रा शुरू होने के कारण शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी गई है। इसलिए भक्तों को मध्याह्न काल से पहले पूजा-अर्चना पूरी कर लेनी चाहिए।
मंदिरों में विशेष सजावट की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कई स्थानों पर हवन, सामूहिक आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालु गणपति को दूर्वा, मोदक, लड्डू, पुष्प और लाल वस्त्र अर्पित करेंगे। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई आराधना से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन के विघ्न दूर होते हैं।
धार्मिक संस्थाओं ने भक्तों से संयम, शांति और परंपराओं का पालन करते हुए पर्व मनाने की अपील की है। साथ ही भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।
कुल मिलाकर, भद्रा के बावजूद गणेश जयंती श्रद्धा और आस्था का पर्व बनी रहेगी, जहां भक्ति पर कोई बाधा नहीं पड़ने वाली।







