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जलती चिताओं के बीच खेली जाती है होली, काशी की अद्भुत परंपरा

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

होली का नाम आते ही रंग, गुलाल और उत्साह की तस्वीर सामने आती है, लेकिन उत्तर प्रदेश के Varanasi में होली का एक ऐसा रूप भी है, जो पूरी दुनिया में अद्वितीय माना जाता है। यहां Manikarnika Ghat पर मनाई जाने वाली ‘मसान होली’ जीवन और मृत्यु के गहरे दर्शन को दर्शाती है।

मसान होली में लोग रंगों की जगह चिता की राख से होली खेलते हैं। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच अघोरी साधु और स्थानीय श्रद्धालु भस्म उड़ाते हैं। सबसे अनोखा दृश्य तब होता है, जब जलती चिताओं के बीच नगरवधुएं नृत्य करती हैं। श्मशान, जिसे आमतौर पर शोक का स्थान माना जाता है, उस दिन उत्सव स्थल में बदल जाता है।

काशी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। मान्यता है कि शिव स्वयं भूत-प्रेतों और अपने गणों के साथ श्मशान में विचरण करते हैं। मसान होली उसी शिव परंपरा से जुड़ी मानी जाती है, जहां मृत्यु को अंत नहीं, बल्कि मोक्ष का मार्ग माना जाता है। यहां राख से खेली जाने वाली होली यह संदेश देती है कि जीवन क्षणभंगुर है और अंततः सब भस्म में मिल जाना है।

नगरवधुओं का नृत्य भी इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे सामाजिक बंधनों से मुक्ति और मोक्ष की कामना का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा बताती है कि मृत्यु के बाद सभी भेद समाप्त हो जाते हैं।

मसान होली केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि काशी की आध्यात्मिक आत्मा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है, जिसे देखने हर साल हजारों लोग पहुंचते हैं।

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