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डिंडोरी का यह परिवार बना रहा बांस से भविष्य, सूपा-खिलौनों से पहचान सम्मानऔर

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहाँ एक परिवार पीढ़ियों से बांस शिल्प के जरिए अपनी पहचान और आजीविका बना रहा है। उमाशंकर और डोलमणि नाम के इस दंपती ने पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार तक पहुँचाकर मिसाल कायम की है।

यह परिवार बांस से सूपा, बिजना, दौरी, डलिया, कमंडल, गुलदस्ते, गुंडी और बच्चों के खिलौने जैसे कई उपयोगी और सजावटी सामान तैयार करता है। इन उत्पादों की गुणवत्ता और खूबसूरती की वजह से इनकी मांग न सिर्फ स्थानीय बाजार में बल्कि अन्य राज्यों तक भी पहुँच चुकी है।

उमाशंकर बताते हैं कि उन्होंने अपने हुनर को लगातार निखारा है और खजुराहो के आदिवर्त जनजाति संग्रहालय में भी बांस से बने उत्पादों पर काम किया है। उनकी बनाई वस्तुएँ पारंपरिक डिज़ाइन के साथ आधुनिक पसंद को भी ध्यान में रखकर तैयार की जाती हैं।

वहीं डोलमणि छोटी-बड़ी डलिया और बांस के बर्तन बनाती हैं, जबकि उमाशंकर सूपा, गुलदस्ते और अन्य डिजाइन वाले उत्पाद तैयार करते हैं। दोनों मिलकर इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं और अपनी कला के जरिए आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भी इनके काम को सराहा गया है, जिससे यह परिवार स्थानीय शिल्प और रोजगार का एक मजबूत उदाहरण बन गया है।

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