इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


भारतीय संस्कृति में तुलसी को केवल एक पौधा नहीं, बल्कि माता का दर्जा दिया गया है. इसी कारण तुलसी की माला पहनना आस्था, भक्ति और सात्विक जीवन का प्रतीक माना जाता है. तुलसी माला को भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण से विशेष रूप से जोड़ा जाता है. लेकिन कई लोग इसे पहन तो लेते हैं, पर इसके सही नियम और मर्यादाएं नहीं जानते.
ज्योतिषाचार्य अंशुल त्रिपाठी के अनुसार, तुलसी माला फैशन या दिखावे की वस्तु नहीं है. इसे धारण करने का उद्देश्य मन की शुद्धता, आत्म अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाना होता है. इसलिए इसे पहनते समय कुछ नियमों का पालन बेहद जरूरी माना गया है.
तुलसी माला हमेशा स्नान के बाद, साफ शरीर और शुद्ध मन से पहननी चाहिए. सुबह का समय सबसे उत्तम माना जाता है. माला धारण करते समय भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण का स्मरण करना शुभ होता है. कुछ लोग “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप भी करते हैं.
तुलसी माला पहनने वाले व्यक्ति को सात्विक जीवन जीने की सलाह दी जाती है. मांसाहार, शराब, नशा और असत्य से दूरी बनाए रखना श्रेष्ठ माना जाता है. साथ ही क्रोध, कटु वचन और गलत आचरण से बचना भी जरूरी होता है.
तुलसी माला को जमीन पर नहीं रखना चाहिए और न ही अपवित्र स्थान पर ले जाना चाहिए. सोते समय या स्नान के दौरान कुछ परंपराओं में माला उतारने की सलाह दी जाती है. अगर माला टूट जाए तो उसे सम्मानपूर्वक जल में प्रवाहित करना चाहिए.







