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: त्रेता युग से जुड़ा आगरा का कैलाश महादेव मंदिर, जहां भगवान परशुराम लाए थे ‘अचल’ महादेव

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

आगरा में यमुना नदी के तट पर स्थित प्राचीन कैलाश महादेव मंदिर न केवल अपनी आध्यात्मिक महिमा, बल्कि अपने अनोखे स्वरूप के कारण भी विशेष स्थान रखता है। यह देश के गिने-चुने मंदिरों में शामिल है, जहां एक ही छत के नीचे दो शिवलिंग स्थापित हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह भारत की एकमात्र ऐसी जगह है, जहां श्रद्धालु एक साथ दो शिवलिंगों के दर्शन कर सकते हैं।

आगरा-मथुरा हाईवे से अधिक दूर नहीं, सिकंदरा क्षेत्र के कैलाश गांव में स्थित यह मंदिर त्रेता युग से जुड़ी एक पौराणिक कथा से संबंधित है। मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि ने कैलाश पर्वत पर वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और वरदान देने को कहा।

किंवदंती के अनुसार, परशुराम और जमदग्नि ने भगवान शिव से सदा अपने साथ रहने का वर मांगा। इस पर महादेव ने कहा कि वे कैलाश पर्वत के कण-कण में विद्यमान हैं और उसी कैलाश की धूल से बने दो शिवलिंग उन्हें प्रदान किए, जिन्हें ‘अचल’ शिवलिंग माना जाता है। यही शिवलिंग आज आगरा के कैलाश महादेव मंदिर में प्रतिष्ठित हैं।

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के संकट दूर होते हैं। सावन, महाशिवरात्रि और सोमवार के दिन यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। कैलाश महादेव मंदिर आज भी आस्था, रहस्य और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।

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