इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित प्रसिद्ध दंतेश्वरी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। इसे दंतेश्वरी शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती का दांत गिरा था, इसलिए इसका नाम ‘दंतेश्वरी’ पड़ा। यह मंदिर न सिर्फ अपनी आध्यात्मिक शक्ति के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां के विशेष नियम भी इसे अलग पहचान देते हैं।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, गर्भगृह में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पारंपरिक वेशभूषा धारण करनी अनिवार्य है। जींस, टी-शर्ट, शर्ट, पैंट या अन्य सिले हुए वस्त्र पहनकर गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं है। भक्तों को धोती, साड़ी या पारंपरिक भारतीय परिधान में ही माता के दर्शन करने होते हैं।
मंदिर परिसर में स्थित एक प्राचीन और चमत्कारी स्तंभ को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इस स्तंभ को स्पर्श कर सच्चे मन से प्रार्थना करने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, यह स्तंभ भक्तों को उनके संकल्प की सफलता का संकेत भी देता है।
हर साल नवरात्रि के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। आस्था, परंपरा और कठोर नियमों का यह अद्भुत संगम दंतेश्वरी मंदिर को देश के प्रमुख शक्तिपीठों में विशिष्ट स्थान दिलाता है।







