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आज़ादी की 72वीं वर्षगांठ के मौके पर सूरजमल इंस्टिट्यूट में संरक्षण हरित अभियान के तत्वाधान में स्वव्छता व पर्यावरण संरक्षण संकल्प एवं वृक्षारोपण कार्यंक्रम का आयोजन किया गया
आज़ादी की 72वीं वर्षगांठ के मौके पर आज जनक पुरी स्तिथ महाराजा सूरजमल इंस्टिट्यूट में संरक्षण हरित अभियान के तत्वाधान में स्वव्छता व पर्यावरण संरक्षण संकल्प एवं वृक्षारोपण कार्यंक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर छात्र- छात्राओं के कालेज परिसर में 200 पौधे लगाये। संरक्षण हरित अभियान के संयोजक श्री संजय पुरी ने छात्र- छात्राओं को शपथ दिलाई कि हम अपने देश की अहिंसा एवं सहनशीलता की परम्परा में दृढ़ विश्वास रखते हैं तथा निष्ठापूर्वक शपथ लेते हैं कि हम सभी प्रकार के आतंकवाद और हिंसा का डट कर विरोध करने के साथ दिल्ली को प्रदुषण से आज़ादी दिलाने के लिये अपने आसपास के पर्यावरण को स्वच्छ रखने व् हराभरा बनाने में अपना योगदान देने के साथ- साथ अपने प्रत्येक जन्मदिन पर एक पौधा या उस से अधिक पोधे लगाने की शपथ दिलाई।
आज की दिल्ली/योगराज शर्मा।
छात्र- छात्राओं ने हरित शपथ हस्ताक्षर-पत्र पर हस्ताक्षर कर के पर्यावरण को स्वच्छ रखने में योगदान देने की इच्छा जताई। इस अवसर पर महाराजा सूरजमल शिक्षा संस्था के सचिव चौ अजित सिंह, ईशा जाखड, राज पाल सोलंकी बी डी डबास महाराजा सूरजमल इंस्टिट्यूट की निर्देशक डॉ रचिता राना ने स्वतन्त्रता सेनानियों के चित्र पर पुष्पांजली से अपनी भाव भीनी श्रधान्जली दी। इस अवसर पर श्री चरण जीत सोढ़ी, हरविंदर सिंह, अमन उप्पल, रीना मेहरा, अनु टंडन, मीणा जोशी, संजय शर्मा, प्रदीप सोलंकी, व चिराग अरोड़ा भी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन श्री योग राज शर्मा ने किया। कार्यक्रम के आशु पंजाबी व अरुण धमीजा ने देशभक्ति के गीत गाए। पूरा परिसर भारत माता की जय, वन्देमातरम के नारे से गूँज रहा था। योग राज शर्मा ने कहा कि वायु प्रदूषण को स्वच्छ बनाने के लिए चलाये वृक्षारोपण अभियान की तारीफ करते हुए कहा कि दिल्ली को हरा भरा व् स्वच्छ बनाने की मुहीम में हम सब संजय पुरी के साथ हैं। संरक्षण हरित अभियान की ओर से कर्नल वी के शर्मा ने आशु पंजाबी, अरुण धमीजा,योगराज शर्मा, परमवीर सिंह व एच पी मल्होत्रा को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
संजय पुरी ने छात्र- छात्राओं को सम्बोदित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति एक दिन में कम से कम 3 गैस सिलैंडर आक्सिजन अपने सांस लेने के लिए इस्तेमाल करता है जिनकी कीमत लगभग 2100 रूपये के करीब बनती है और यदि व्यक्ति लगभग 65 बर्ष तक जीता है तो वह अपने जीवन में लगभग 5 करोड़ रूपये की आक्सिजन अपने सांस के लिए प्रयोग करता है जो कि प्रकृति द्वारा पेड़ पौधों से प्राप्त करके जीवों को फ्री में प्रदान की जा रही है लेकिन मनुष्य पेड़ पौधों के महत्व को भूलता जा रहा है और पेड़ों को काट काट कर पर्यावरण को नुकसान पंहुचा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि पर्यावरण की देखभाल को केवल सरकारी क्षेत्र का कार्य मानने से हम अपने पर्यावरण को संतुलित नहीं रख सकते। सुरक्षित संसाधन संरक्षित पर्यावरण के नारे को अपने आचरण का अंग बना अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ ही पर्यावरण को हर प्रकार के प्रदूषण से बचाना भी समय की आवश्यकता है।