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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026: अटके काम और बढ़ते तनाव से राहत के लिए जानें पूजा विधि और महत्व

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व माना जाता है, और साल 2026 में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 5 फरवरी को मनाई जा रही है। यह दिन भगवान गणेश की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, अटके हुए काम पूरे होने लगते हैं और मानसिक तनाव में भी राहत मिलती है।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इस दिन सुबह स्नान करके गणपति बप्पा का ध्यान किया जाता है और दिनभर व्रत रखा जाता है। शाम के समय भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है, जिसमें दूर्वा, मोदक और लाल फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। माना जाता है कि गणपति पर सच्चे मन से विश्वास और श्रद्धा के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करता है।

आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मसंयम, धैर्य और सकारात्मक सोच को मजबूत करने का भी अवसर है। हालांकि यह सभी आस्थाओं और परंपराओं पर आधारित विश्वास हैं, इसलिए लोग अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार पूजा विधि अपना सकते हैं।

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