इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


नया साल केवल तारीख बदलने का नाम नहीं है,
यह अपने विचार, अपने आचरण और अपने लक्ष्य को नया रूप देने का अवसर है।
हमारी संस्कृति में दो महान ग्रंथ — रामायण और महाभारत — ऐसे दीपस्तंभ हैं,
जो हर दौर के मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा दिखाते हैं।
रामायण में जब भगवान श्रीराम को वनवास मिला,
तो वह उनके जीवन की सबसे बड़ी “असफलता” मानी जा सकती थी।
राजा बनने की जगह जंगल जाना पड़ा,
लेकिन राम ने उसे नियति मानकर स्वीकार किया।
उसी वनवास ने उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम बनाया।
महाभारत में पांडवों को जुए में सब कुछ हारना पड़ा,
अपमान, वनवास और पीड़ा सहनी पड़ी।
लेकिन उन्होंने हार को अंत नहीं माना।
हर गिरावट से उन्होंने नई शक्ति पाई —
और अंत में धर्म की जीत हुई।
सीख:
असफलता आपको तोड़ने नहीं, तराशने आती है।
जो गिरकर भी सीखता है, वही असली विजेता बनता है।
श्रीराम ने 14 वर्षों का वनवास बिना शिकायत सहा।
सीता हरण, वियोग, युद्ध — हर परीक्षा में उन्होंने धैर्य नहीं छोड़ा।
महाभारत में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा —
“धैर्य और विवेक से लिया गया निर्णय ही धर्म है।”
युद्ध से पहले अर्जुन टूट गया था,
लेकिन धैर्य और गीता का ज्ञान उसे फिर खड़ा कर गया।







