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पूजा का तिलक क्यों है खास? शास्त्रों में बताया गया महत्व और सही तरीका, जानें कहीं आप तो नहीं कर रहे गलती

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

भारतीय परंपराओं में तिलक केवल एक धार्मिक चिह्न नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और संरक्षण का प्रतीक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार तिलक माथे के उस स्थान पर लगाया जाता है जिसे आज्ञा चक्र कहा जाता है—दोनों भौंहों के बीच का भाग। योग और तंत्र शास्त्र में इसे चेतना और जागरूकता का केंद्र माना गया है।

मान्ता है कि तिलक लगाने से मन स्थिर होता है, ध्यान शक्ति बढ़ती है और विचारों में स्पष्टता आती है।तिलक को एक प्रकार का ‘ऊर्जा कवच’ माना गया है, जो नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करता है।चंदन तिलक: शांति और शीतलता का प्रतीक।रोली या कुमकुम: शक्ति और मंगल का संकेत।हल्दी तिलक: पवित्रता और सौभाग्य से जुड़ा।भस्म (विभूति): वैराग्य और आध्यात्मिकता का प्रतीक, जिसका उल्लेख शिव पुराण में भी मिलता है।अक्षत (चावल) के साथ तिलक: पूर्णता और समृद्धि का भाव।

स्नान के बाद स्वच्छ अवस्था में तिलक लगाएं।दाहिने हाथ की अनामिका या अंगूठे से तिलक करना शुभ माना जाता है।तिलक लगाते समय इष्ट देव का स्मरण करें।विशेषज्ञों का कहना है कि तिलक आस्था का विषय है। इसे श्रद्धा, स्वच्छता और सकारात्मक भाव के साथ करना ही सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।

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