इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन वर्ष का अंतिम यानी बारहवां महीना होता है। इसे फागुन का महीना भी कहा जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह महीना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है, क्योंकि इसी मास में महाशिवरात्रि और होली जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। फाल्गुन मास को भक्ति, दान और आत्मशुद्धि का समय माना जाता है।
मान्यता है कि इस महीने में किए गए दान-पुण्य, व्रत और पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। इस दौरान भगवान शिव की उपासना करना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
फाल्गुन मास में मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहना चाहिए। इस दौरान क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और वाणी की कठोरता से बचने की सलाह दी जाती है। शास्त्रों के अनुसार इस महीने में असत्य बोलना, विवाद करना और दूसरों को कष्ट देना अशुभ माना जाता है।
होली के पर्व को प्रेम, भाईचारे और समरसता के प्रतीक के रूप में मनाना चाहिए। फाल्गुन मास हमें यह सिखाता है कि जीवन के अंत की ओर बढ़ते समय हमें अपने भीतर की नकारात्मकता को त्यागकर सकारात्मकता और भक्ति को अपनाना चाहिए।
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