इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


हिंदू पंचांग में फाल्गुन माह को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है. यह साल का अंतिम महीना होता है, जो आत्मचिंतन, संयम और भक्ति का संदेश देता है. द्रिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह 2026 की शुरुआत 2 फरवरी से होगी और 3 मार्च को इसका समापन होगा. इस दौरान महाशिवरात्रि और होली जैसे प्रमुख पर्व आते हैं, जिससे इस महीने का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है.
शास्त्रों में फाल्गुन मास को आत्मशुद्धि और पुण्य संचय का काल बताया गया है. माना जाता है कि इस समय प्रकृति बदलाव के दौर से गुजरती है और मनुष्य को भी अपने आचरण और विचारों को शुद्ध करने का अवसर मिलता है. इस महीने भगवान शिव और श्रीकृष्ण की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है
इस दौरान नियमित पूजा-पाठ, जप और ध्यान करना शुभ माना जाता है. गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. सेवा भाव अपनाने, सत्य बोलने और संयमित जीवन जीने से मानसिक शांति मिलती है. ब्रह्मचर्य और सात्विक भोजन का पालन करना भी लाभकारी माना गया है.
फाल्गुन माह में क्रोध, अहंकार, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए. नशा, हिंसा, अनैतिक आचरण और तामसिक भोजन को वर्जित माना गया है. किसी का अपमान या छल करने से इस महीने के पुण्य फल नष्ट हो सकते हैं.
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, श्रद्धा और अनुशासन के साथ बिताया गया फाल्गुन माह जीवन में सकारात्मक बदलाव, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है.







