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बंगाल वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश, जरूरत पड़े तो दूसरे राज्यों से बुलाए जाएं जज

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने एक अभूतपूर्व निर्देश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि यदि 50 से 80 लाख आपत्तियों के निपटारे के लिए जजों की कमी पड़ती है, तो कलकत्ता हाईकोर्ट पड़ोसी राज्यों से सिविल और जिला जजों की सेवाएं ले सकता है।

Supreme Court of India की इस टिप्पणी को भारतीय न्यायिक इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर मामलों का ट्रांसफर किया जाता है, न कि जजों को अस्थायी रूप से दूसरे राज्यों से बुलाया जाता है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और समयबद्धता सर्वोपरि है।

निर्देश के अनुसार Calcutta High Court जरूरत पड़ने पर Jharkhand और Odisha से न्यायिक अधिकारियों को बुला सकता है। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि वोटर लिस्ट पर लंबित आपत्तियों का समय पर समाधान न होने से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश न्यायिक संघवाद की नई मिसाल पेश करता है, जहां राज्यों के बीच सहयोग से न्यायिक कामकाज को गति दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख संकेत देता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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