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बसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनने की परंपरा: जानिए धार्मिक और सांस्कृतिक कारण

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

नई दिल्ली: बसंत पंचमी, जिसे श्री पंचमी या ज्ञान पंचमी भी कहा जाता है, बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक पर्व है। इस दिन देवी सरस्वती की पूजा होती है, जिन्हें ज्ञान, कला, संगीत और विद्या की अधिष्ठात्री माना जाता है।

इस दिन पीले कपड़े पहनने की परंपरा सदियों पुरानी है और इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं – धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक।

बसंत ऋतु को ‘ऋतुराज’ कहा जाता है, क्योंकि यह मौसम सुख, समृद्धि और सौंदर्य का संदेश लेकर आता है। इस मौसम में सरसों के खेत पूरी तरह पीले फूलों से भर जाते हैं, जो खेतों और प्रकृति की सुंदरता को दर्शाते हैं।

पीला रंग देवी सरस्वती का प्रिय रंग माना जाता है। इसलिए इस दिन पीले वस्त्र पहनना उनकी कृपा और आशीर्वाद पाने का प्रतीक है।

पीला रंग सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान और समृद्धि का संकेत देता है। बसंत पंचमी पर पीला भोजन और पीले कपड़े पहनना शुभता और उत्सव का प्रतीक माना जाता है।

इस प्रकार, बसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनना सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि ऋतु, देवी सरस्वती और शुभ ऊर्जा का संगम है।

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