इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


( दोनों सेनाओं की शंख-ध्वनि का कथन )तस्य सञ्जनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः ।सिंहनादं विनद्योच्चैः शंख दध्मो प्रतापवान् ॥भावार्थ : कौरवों में वृद्ध बड़े प्रतापी पितामह भीष्म ने उस दुर्योधन के हृदय में हर्ष उत्पन्न करते हुए उच्च स्वर से सिंह की दहाड़ के समान गरजकर शंख बजाया॥12॥
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