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बेगमपुर पुलिस थाने में ‘श्चाइल्ड फ्रेंडली रूम ’ बनाने और आईएएस/आईपीएस परीक्षाओं की खातिर दिल्ली पुलिस कर्मियों के 50 बच्चों को नि:शुल्क संरक्षण देने के लिए एमके यादव को किया सम्मानित

Journalist Today Network2 मिनट में पढ़ें

नई दिल्ली, 27 दिसंबर 2021 : दिल्ली पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस संचालित स्कूल टेस्टिंग प्लेटफॉर्म एआई टेस्टिफाइड के सीएमडी एमके यादव को सम्मानित किया, जिन्होंने बेगमपुर पुलिस थाना, रोहिणी में शिशु अनुकूल कक्ष स्थापित किया और आईएएस/आईपीएस की तैयारी करने वाले दिल्ली पुलिसकर्मियों के 50 प्रतिभाशाली बच्चों का नि:शुल्क मार्गदर्शन किया है। एम के यादव खुद आईबी और निगरानी विभाग के अधिकारी रह चुके हैं और उन्होंने दिल्ली पुलिसकर्मियों के उन 500 प्रतिभाशाली बच्चों को 100 फीसदी छात्रवृत्ति देने की घोषणा की है जो नौवीं से बारहवीं परीक्षाओं के सत्रों की तैयारी कर रहे हैं।
दिल्ली पुलिस के कमिश्नर राकेश अस्थाना (आईपीएस) ने स्कूली शिक्षा प्रणाली और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करने के लिए एमके यादव के असाधारण योगदान की सराहना की। इस मौके पर अन्य प्रतिष्ठित हस्तियों में प्रणव तायल, आईपीएस, डीसीपी, रोहिणी, एआई टेस्टिफाइड टीम तथा माई स्टेम लैब टीम के सदस्य शामिल थे। यादव ने बताया कि एआई टेस्टिफाइड एक स्टार्टअप है जिसकी परिकल्पना आईआईटी कानपुर में तैयार की गई थी और अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस संचालित वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं के जरिये सरकारी स्कूलों की कमियां दूर करने के लिए दिल्ली सरकार के 10 स्कूलों में (सीएसआर मुहिम के तहत) यह एआई आधारित समाधान लागू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसका महत्व तब और बढ़ गया है जब से सीबीएसई ने घोषणा की है कि वह नई शिक्षा नीति 2020 के मुताबिक टर्म आधारित परीक्षा नीति (एमसीक्यू संचालित) लागू करने जा रही है।
यादव ने कहा, एआई टेस्टिफाइड एक विशेष टेस्ट प्लेटफॉर्म है, जहां प्रत्येक छात्र की कॉन्सेप्ट आधारित कमजोरी और ताकत की पहचान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल किया जाता है। इसके टेस्ट प्रत्येक छात्र के सुधारवादी क्षेत्रों के मुताबिक तैयार किए गए हैं। जानकारी की कमी वाले क्षेत्र के लिए वीडियो लेक्चर भी प्रदान किए जाते हैं। साथ ही छात्रों को विकल्प छांटने का इस्तेमाल करने का मौका दिया जाता है और सबसे उपयुक्त विकल्प चुनने के लिए 50/50 तकनीक बताई जाती है। इससे छात्रों को अपने कॉन्सेप्ट्स की सटीक आकलन करने तथा अपनी कठिन सोच क्षमता विकसित करने में मदद मिलती है।

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