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भगवान की भक्ति नि:स्वार्थ भाव से करें-पं. शास्त्री

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

रिपोर्ट - पवन दाधीच खिरोड़ में पुजारी भवन में चल रही भागवत कथा का समापनखिरोड़ -खिरोड़ में बसावा रोड़ पर चल रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के अंतिम दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर करते हुए पं. सांवरमल शास्त्री दांतरू वाले ने कहा कि भगवान की भक्ति करने से मनुष्य जीवन सफल एवं सार्थक बन जाता है। बशर्ते मनुष्य द्वारा की गई भगवान की भक्ति में नि:स्वार्थ भाव होना चाहिए। कथा महोत्सव के समापन समारोह के दौरान व्यासपीठ पर आसीन पं. शास्त्री ने कहा कि भगवान के लिए मनुष्य के ह्दय में प्रेम रूपी भावना होनी चाहिए इससे भगवान उस मनुष्य पर पूरी तरह प्रसन्न हो जाते है और भगवान उसकी रक्षा करते है ताकि उसका जीवन सफल बन सके। पं. शास्त्री ने संगीतमय भजनों के माध्यम से भागवत कथा के उद्ध व चरित्र की कथा को विस्तार पूर्वक समझाया। कथा के समापन के बाद शोभा यात्रा निकाली गई। जो कस्बे के मुख्य मार्गो सये होते हुए श्रीगोपालजी मंदिर पहुंची। इससे पूर्व यजमान गजानंद पुजारी ने सपत्नीक पूजार्चना एवं आरती की। इस मौके पर हनुमाराम डूडी, जगदीश प्रसाद भींचर, शंकरलाल पारीक, औंकारमल लेगा, रामलाल शर्मा, जुगलकिशोर दाधीच, बनवारीलाल शर्मा आदि मौजूद थे।

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