इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


भारत की सनातन परंपरा में जल को जीवन, शुद्धि और मोक्ष का प्रतीक माना गया है. इसी आस्था से जुड़े हैं देश के पंच सरोवर, जिन्हें हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र जल तीर्थ का दर्जा प्राप्त है. मान्यता है कि इन पांच सरोवरों का दर्शन, स्नान या स्मरण मात्र से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है.
धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार पंच सरोवरों के नामों में कुछ भिन्नता मिलती है, लेकिन उनका भाव एक ही है—आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति. कई आचार्य इन पंच सरोवरों को पंचमहाभूत—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का प्रतीक मानते हैं. माना जाता है कि ये जलस्रोत साधक के भीतर संतुलन, संयम और पूर्णता का विकास करते हैं.
इन पवित्र सरोवरों में प्रमुख रूप से मानसरोवर, बिंदु सरोवर, पुष्कर सरोवर, नारायण सरोवर और पम्पा सरोवर को शामिल किया जाता है. मानसरोवर को शिव-साक्षात का स्थल माना जाता है, वहीं पुष्कर सरोवर ब्रह्मा जी से जुड़ा है. बिंदु सरोवर को माता सती की तपस्थली कहा जाता है, जबकि नारायण और पम्पा सरोवर वैष्णव और शैव परंपरा से जुड़े हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन पंच सरोवरों की यात्रा या श्रद्धापूर्वक स्मरण से जीवन के क्लेश दूर होते हैं और साधक को मोक्ष की दिशा में अग्रसर होने का अवसर मिलता है. यही कारण है कि पंच सरोवर आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने हुए हैं.







