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हिंदू धर्म में मंत्र जप की शुरुआत ‘ॐ’ से करना एक प्राचीन और गहरी आध्यात्मिक परंपरा मानी जाती है। सुबह के समय मंदिरों और घरों में जब मंत्रोच्चार होता है, तो अधिकतर मंत्र ‘ॐ’ से शुरू किए जाते हैं। सवाल उठता है कि क्या बिना ‘ॐ’ के मंत्र फल नहीं देते या यह केवल श्रद्धा का प्रतीक है। धार्मिक ग्रंथों और योग परंपरा के अनुसार ‘ॐ’ को ब्रह्मांड की मूल ध्वनि माना गया है, जो मन और चेतना को एकाग्र करने में मदद करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘ॐ’ मंत्र और साधक के बीच एक सेतु का काम करता है। इससे ध्यान केंद्रित होता है और जप का प्रभाव गहरा होता है। भोपाल के ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, ‘ॐ’ कोई बाध्यता नहीं बल्कि साधना को सहज बनाने वाला माध्यम है। यदि कोई व्यक्ति बिना ‘ॐ’ के भी मंत्र जप करता है तो श्रद्धा और सही उच्चारण के साथ किया गया जप भी प्रभावी हो सकता है।
हालांकि, शास्त्रों में कई मंत्रों के साथ ‘ॐ’ का प्रयोग परंपरा और ऊर्जा संतुलन के लिए सुझाया गया है। विशेषज्ञ कहते हैं कि मंत्र जप का असली प्रभाव तब दिखता है जब उसे समझ, श्रद्धा और नियमित अभ्यास के साथ किया जाए। इसलिए ‘ॐ’ को बोझ नहीं, बल्कि ध्यान और आध्यात्मिक जुड़ाव को मजबूत करने वाले सहयोगी के रूप में देखा जाना चाहिए।
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