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मद्रास हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी: धर्म त्यागे बिना जाति-पंथ का उल्लेख हटाना संभव नहीं

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

Madras High Court ने जाति और पंथ के उल्लेख को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। जस्टिस Krishnan Ramasamy ने कहा कि हिंदू परंपरा और मौजूदा कानूनी व्यवस्था के तहत जब तक कोई व्यक्ति विधिवत रूप से अपना धर्म त्याग नहीं करता, तब तक उसके प्रमाण पत्र से जाति और पंथ का उल्लेख हटाया नहीं जा सकता।

अदालत यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान कर रही थी, जिसमें आवेदक ने बिना धर्म परिवर्तन के अपने आधिकारिक दस्तावेजों से जाति और संप्रदाय का उल्लेख हटाने की मांग की थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक अभिलेख केवल व्यक्तिगत पहचान का विषय नहीं हैं, बल्कि उनका संबंध आरक्षण, सामाजिक न्याय और विभिन्न सरकारी योजनाओं से भी जुड़ा होता है।

जस्टिस रामस्वामी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी धार्मिक या सामाजिक पहचान में बदलाव चाहता है, तो उसे विधि सम्मत प्रक्रिया अपनानी होगी। केवल आवेदन देकर प्रमाण पत्र में बदलाव की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।

अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत ऐसी राहत देना संभव नहीं है। इस फैसले को सामाजिक पहचान और संवैधानिक व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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