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माघ मास की पौराणिक कथा, स्नान-दान का महत्व और पूरे महीने के प्रमुख व्रत-त्योहार

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास को अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी महीना माना गया है। वर्ष 2026 में माघ मास की शुरुआत जनवरी के मध्य से होगी। धर्मग्रंथों में कहा गया है कि इस मास में किया गया स्नान, दान और जप-तप सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फल देता है।

माघ मास की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास में देवता पृथ्वी पर वास करते हैं। इसी दौरान गंगा सहित सभी पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं। कहा जाता है कि जब गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं, तब देवताओं ने माघ मास में उनका विशेष पूजन किया था।

माघ स्नान का महत्व

माघ मास में प्रातःकाल गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र जल स्रोत में स्नान करने से आत्मिक शुद्धि होती है। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना, विष्णु और शिव का पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

दान का विशेष फल

इस मास में तिल, गुड़, कंबल, अन्न और वस्त्र दान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि माघ मास का तिल दान दरिद्रता दूर करता है और पुण्य की वृद्धि करता है।

माघ मास के प्रमुख व्रत-त्योहार

  • सकट चौथ

  • माघ अमावस्या

  • मौनी अमावस्या

  • वसंत पंचमी

  • माघ पूर्णिमा

धर्मशास्त्रों के अनुसार, माघ मास संयम, सेवा और साधना का समय है। जो श्रद्धालु पूरे माह नियमपूर्वक व्रत-अनुष्ठान करते हैं, उन्हें मोक्ष और लोक-परलोक दोनों का सुख प्राप्त होता है।

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