इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


भारत में हिंदू परिवार अपने परिजन के निधन के बाद अक्सर 13 दिनों तक गरुड़ पुराण का पाठ कराते हैं। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि इसके पीछे आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक कारण भी हैं। हाल ही में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद उनका परिवार इसी परंपरा का पालन कर रहा है।
ज्योतिष और धर्मशास्त्र के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा पहले अपने शरीर के आसपास, फिर घर में मंडराती रहती है। इस दौरान गरुड़ पुराण का पाठ उसे शांति और मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह पाठ आत्मा को यह समझाने में मदद करता है कि अब उसका शरीर से मोह समाप्त हो चुका है और उसे नई यात्रा पर निकलना है।
गरुड़ पुराण में विस्तार से बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा कैसी होती है और किस प्रकार उसे अंतिम मोक्ष या परलोक की ओर अग्रसरित किया जा सकता है। इसे सुनने से मृतक की आत्मा मन की शांति पाती है और परिवार भी इस प्रक्रिया में अपने भावनात्मक जुड़ाव और श्रद्धा के माध्यम से मानसिक संतोष महसूस करता है।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, 13 दिन का समय इसलिए रखा जाता है ताकि आत्मा धीरे-धीरे अपने भौतिक बंधनों से मुक्त होकर आगे बढ़ सके। पाठ के दौरान परिवार और श्रद्धालु इस यात्रा में उसे सकारात्मक ऊर्जा और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
इस प्रकार गरुड़ पुराण का पाठ मृतक की आत्मा को शांति देने के साथ-साथ परिवार के लिए भी मानसिक और आध्यात्मिक राहत का माध्यम है।







