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मृत व्यक्ति के पैर क्यों छुए जाते हैं? हिंदू अंतिम संस्कार से जुड़ा भावनात्मक और आध्यात्मिक रिवाज

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

हिंदू धर्म में जीवन के हर पड़ाव से जुड़े संस्कारों का विशेष महत्व होता है. जन्म से लेकर मृत्यु तक किए जाने वाले ये संस्कार न सिर्फ धार्मिक होते हैं, बल्कि व्यक्ति और परिवार को मानसिक व भावनात्मक सहारा भी देते हैं. जब कोई अपना इस संसार से विदा होता है, तो अंतिम संस्कार से पहले मृत व्यक्ति के पैर छूने की परंपरा निभाई जाती है. अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब व्यक्ति जीवित नहीं रहा, तब उसके पैर क्यों छुए जाते हैं?

भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, मृत व्यक्ति के पैर छूना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि अंतिम सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता प्रकट करने का तरीका है. यह उस व्यक्ति के प्रति आभार जताने का मौन भाव होता है, जिसने जीवन भर परिवार को सहारा दिया, मार्गदर्शन किया और अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया.

मान्यता है कि इस प्रक्रिया से परिवार के सदस्य अपने मन की भावनाओं को व्यक्त कर पाते हैं और अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देने का साहस जुटाते हैं. यह क्षण व्यक्ति को मृत्यु की सच्चाई स्वीकार करने में मदद करता है, जिससे मन का बोझ कुछ हल्का होता है.

धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो यह रिवाज आत्मा की शांति की कामना से भी जुड़ा है. माना जाता है कि श्रद्धा और सम्मान के साथ किया गया यह कर्म दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करता है और उसकी आगे की यात्रा को सहज बनाता है.

इस तरह मृत व्यक्ति के पैर छूना सिर्फ एक सामाजिक रिवाज नहीं, बल्कि भावनाओं, आस्था और आत्मिक शांति से जुड़ा एक गहरा संस्कार है, जो दुख की घड़ी में परिवार को मानसिक संबल देता है.

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