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मोबाइल के साथ खाना पड़ सकता है भारी! शास्त्रों के ये भोजन नियम आज भी जरूरी क्यों हैं

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

हम रोज़ाना खाना खाते हैं, लेकिन अक्सर जल्दी में, मोबाइल या टीवी देखते हुए भोजन कर लेते हैं. वहीं, भारतीय संस्कृति में भोजन को सिर्फ शरीर की आवश्यकता नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और मानसिक ऊर्जा का स्रोत माना गया है. हिंदू शास्त्रों में अन्न को ‘अन्न ब्रह्म’ कहा गया है और इसे देवी अन्नपूर्णा और भगवान विष्णु से जोड़ा गया है. इसलिए खाने से पहले और बाद के नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है.

भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, भोजन से जुड़ी ये परंपराएं न केवल धार्मिक हैं, बल्कि हमारे मन और जीवन को संतुलित रखने में भी मदद करती हैं. शास्त्रों में कहा गया है कि जिस भाव और मानसिक स्थिति के साथ भोजन किया जाता है, उसका असर शरीर और जीवन दोनों पर पड़ता है. गुस्से या तनाव में खाया भोजन शरीर को पूर्ण पोषण नहीं देता, जबकि शांत मन और श्रद्धा से किया गया भोजन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है.

शास्त्रों के अनुसार, भोजन करते समय ध्यान और संयम बनाए रखना चाहिए, मोबाइल या अन्य व्याकुलताओं से बचना चाहिए. खाने के समय नमक, पानी और भोजन को उचित तरीके से ग्रहण करना भी शुभ माना गया है. इन नियमों को अपनाने से न केवल स्वास्थ्य सुधरता है, बल्कि मन शांत रहता है, सोच स्पष्ट होती है और जीवन में संतुलन आता है.

संक्षेप में, भोजन केवल पेट भरने का माध्यम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा की ऊर्जा को संतुलित करने वाला कर्म है. इसलिए शास्त्रों के इन नियमों का पालन करना आज भी बेहद जरूरी माना जाता है.

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