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यहां हुआ था सीता हरण, क्यों काली है रामजी की मूर्ति? दलित आंदोलन से भी जुड़ा है इतिहास

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

Shree Kala Ram Mandir: आपने देशभर में भगवान राम के कई भव्य मंदिर देखे होंगे, लेकिन महाराष्ट्र के नासिक के पंचवटी क्षेत्र में स्थित श्री कालाराम मंदिर अपनी अनोखी विशेषताओं और ऐतिहासिक महत्व के कारण अलग पहचान रखता है। यहां भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की काले पत्थर की प्रतिमाएं विराजमान हैं, जिनके कारण इसे “कालाराम” कहा जाता है।

नासिक का पंचवटी क्षेत्र रामायण काल से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने यहीं निवास किया था। इसी क्षेत्र में रावण द्वारा माता सीता के हरण की कथा भी जुड़ी हुई है। इसलिए यह स्थान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है।

मंदिर में स्थापित मूर्तियां काले पत्थर की बनी हैं। कहा जाता है कि ये प्रतिमाएं गोदावरी नदी से प्राप्त हुई थीं। काले पत्थर से निर्मित होने के कारण भगवान को यहां “कालाराम” के नाम से पूजा जाता है। मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में पेशवा काल में हुआ था और इसकी वास्तुकला भी काले पत्थरों से बनी भव्य शैली में है।

यह मंदिर सामाजिक इतिहास से भी गहराई से जुड़ा है। वर्ष 1930 में भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में यहां मंदिर प्रवेश आंदोलन चलाया गया था। उस समय दलितों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। यह आंदोलन सामाजिक समानता और अधिकारों की लड़ाई का एक महत्वपूर्ण अध्याय बना। इस कारण कालाराम मंदिर केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी प्रतीक माना जाता है।

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