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रामायण में कितने कांड हैं? बाल कांड से उत्तर कांड तक भगवान श्रीराम की संपूर्ण जीवन यात्रा

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला सनातन धर्म का अमूल्य आधार है. यह ग्रंथ भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म पालन और कर्तव्यबोध की संपूर्ण कथा प्रस्तुत करता है. महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण को सात कांडों में विभाजित किया गया है, जिनमें भगवान राम के जन्म से लेकर उनके राज्याभिषेक और जीवन के अंतिम चरण तक की घटनाओं का विस्तार से वर्णन मिलता है.

रामायण का पहला कांड बाल कांड है, जिसमें भगवान राम के जन्म, गुरु वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा, विश्वामित्र के साथ यज्ञ रक्षा और सीता स्वयंवर का वर्णन है. दूसरा अयोध्या कांड राम के वनवास, दशरथ की मृत्यु और भरत के त्याग को दर्शाता है. तीसरा अरण्य कांड वनवास के दौरान ऋषियों की रक्षा और सीता हरण की कथा बताता है.

चौथा किष्किंधा कांड सुग्रीव से मित्रता और वानर सेना के गठन का वर्णन करता है, जबकि पांचवां सुंदर कांड हनुमान जी की लंका यात्रा और सीता माता से भेंट का प्रतीक है. छठा लंका कांड (युद्ध कांड) राम-रावण युद्ध और अधर्म पर धर्म की विजय को दर्शाता है. सातवां और अंतिम उत्तर कांड राम के राज्याभिषेक और उनके आदर्श शासन की कथा कहता है.

रामायण के ये सातों कांड जीवन में धैर्य, साहस, मर्यादा, मित्रता और धर्म के महत्व की शिक्षा देते हैं. यही कारण है कि रामायण आज भी हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है.

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