सामग्री पर जाएँ
Aaj Ki Delhi
धर्म

विंध्याचल का दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर, रावण संहिता में उल्लेख

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के पवित्र धाम विंध्याचल में स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यह प्राचीन मंदिर मां विंध्यावासिनी देवी के धाम परिसर में स्थित है और हजारों वर्षों से यहां पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का जिक्र ‘रावण संहिता’ में मिलता है। कहा जाता है कि लंकापति रावण हर स्थान पर दर्शन के लिए नहीं जाते थे, लेकिन मां विंध्यावासिनी और भोलेनाथ के अवतार के दर्शन के लिए वे यहां पुष्पक विमान से आते थे।
इस मंदिर में विराजमान हनुमान दक्षिणमुखी स्वरूप में हैं, जिसे अत्यंत प्रभावशाली और शीघ्र फलदायी माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है, इसलिए इसे ‘मनोरथ पूर्ण करने वाला मंदिर’ भी कहा जाता है।
हर मंगलवार को हजारों की संख्या में भक्त घी के दीपक, लड्डू और मालाएं लेकर दर्शन करने पहुंचते हैं। हनुमान जयंती के अवसर पर यहां विशेष श्रृंगार किया जाता है और भक्तों की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संकटमोचन हनुमान यहां अपने भक्तों के कष्ट हरते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। यही वजह है कि यह मंदिर न केवल मिर्जापुर, बल्कि पूरे प्रदेश में गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है।

धर्म की और ख़बरें

सभी देखें