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शक्ति पीठों में सबसे रहस्यमय कामाख्या देवी मंदिर: जहां मूर्ति नहीं, योनि कुंड की होती है पूजा

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

भारत में शक्ति उपासना की परंपरा अत्यंत प्राचीन और गहरी मानी जाती है. देशभर में मां शक्ति के अनेक रूपों के मंदिर स्थापित हैं, लेकिन असम के गुवाहाटी स्थित कामाख्या देवी मंदिर को शक्ति पीठों में सबसे रहस्यमय और विशिष्ट माना जाता है. यह मंदिर नीलांचल पर्वत पर स्थित है और तंत्र साधना, नारी शक्ति व सृजन के प्रतीक के रूप में प्रसिद्ध है.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के मृत शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े किए. जिस स्थान पर माता सती की योनि गिरी, वही स्थान कामाख्या शक्ति पीठ के रूप में प्रतिष्ठित हुआ. इसी कारण यहां देवी की कोई प्रतिमा नहीं है, बल्कि एक पवित्र योनि कुंड की पूजा होती है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है.

कामाख्या मंदिर का संबंध तंत्र साधना से भी गहराई से जुड़ा है. यहां तांत्रिक, साधक और श्रद्धालु विशेष अनुष्ठान करने के लिए आते हैं. हर वर्ष होने वाला अंबुबाची मेला इस मंदिर की सबसे बड़ी पहचान है, जिसमें देवी के रजस्वला होने की मान्यता के साथ मंदिर कुछ दिनों के लिए बंद रहता है और फिर विशेष पूजा के साथ खोला जाता है.

आस्था, रहस्य और परंपरा का संगम माने जाने वाला कामाख्या देवी मंदिर आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए शक्ति, विश्वास और अध्यात्म का केंद्र बना हुआ है.

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