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संत की शिष्यों को सीख: ज्ञान तभी सार्थक है जब वह जीवन में उतरे

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

संतों का स्पष्ट संदेश है कि केवल ज्ञान अर्जित कर लेना ही पर्याप्त नहीं होता। जब तक हम उस ज्ञान को अपने दैनिक जीवन, आचरण और कर्म में लागू नहीं करते, तब तक उसका कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलता।

अनेक लोग शास्त्र पढ़ते हैं, प्रवचन सुनते हैं, उपदेशों को दोहराते हैं, लेकिन यदि वही ज्ञान आचरण में न बदले, तो वह बोझ बन जाता है, साधना नहीं। संत कहते हैं कि ज्ञान का उद्देश्य प्रदर्शन नहीं, जीवन परिवर्तन है।

जब ज्ञान व्यवहार में उतरता है, तभी वह हमें

  • अहंकार से मुक्त करता है,

  • विवेक देता है,

  • और सही–गलत का भेद सिखाता है।

सच्चा शिष्य वही है जो सुनकर नहीं, समझकर और अपनाकर आगे बढ़ता है। थोड़े-से भी ज्ञान को यदि ईमानदारी से जीवन में उतार लिया जाए, तो वही साधना बन जाता है और वही मुक्ति का मार्ग दिखाता है।

संतों की यह सीख हमें याद दिलाती है कि

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