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“सब हम कर रहे हैं या भगवान की इच्छा से हो रहा है?” – ओशो की दृष्टि से अष्टावक्र गीता

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

ओशो के अनुसार, जब हम स्वयं को छोड़कर संपूर्ण समर्पण कर देते हैं, तभी परमात्मा का अनुभव वास्तविक रूप मेंओशो की किताब अष्टावक्र गीता महाभाग-7 उन सभी साधकों और आध्यात्मिक पिपासुओं के लिए समर्पित है, जो स्वतंत्रता और आत्म-ज्ञान की खोज में हैं।

इस ग्रंथ में ओशो बताते हैं:

  • क्या हमारे कर्म हम कर रहे हैं या यह सब भगवान की इच्छा से हो रहा है?

  • परमात्मा को कैसे पाया जा सकता है और उसका अनुभव कैसे किया जाए?

  • ईश्वर और आत्मा के बीच का अद्भुत संबंध क्या है।

ओशो के अनुसार, जब मनुष्य स्वयं को छोड़कर पूर्ण समर्पण करता है, तभी वह परमात्मा का अनुभव कर सकता है। यह ग्रंथ हमें आध्यात्मिक चेतना, मुक्त जीवन और अंतरात्मा की खोज की दिशा दिखाता है।

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