इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


नई दिल्ली। सावन का पावन महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे शुभ समय माना जाता है। इस माह में श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और बेलपत्र अर्पित कर भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि बेलपत्र के बिना शिव पूजा अधूरी मानी जाती है। हालांकि पूजा में सही बेलपत्र का चयन करना भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि कटे-फटे या दोषयुक्त बेलपत्र अर्पित करना उचित नहीं माना गया है।
भगवान शिव को अर्पित किए जाने वाले बेलपत्र का चयन करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए—
बेलपत्र में तीन पत्तियां (त्रिपत्र) होना शुभ माना जाता है।
जिस बेलपत्र में तीन पत्तियां न हों, उसे शिव पूजा में उपयोग नहीं करना चाहिए।
बेलपत्र का रंग हरा और ताजा होना चाहिए। पीले, धब्बेदार या चितकबरे पत्तों से पूजा नहीं करनी चाहिए।
बेलपत्र कटा, फटा, टूटा या मुरझाया हुआ नहीं होना चाहिए।
यदि किसी बेलपत्र में एक पत्ता अत्यधिक बड़ा और बाकी दो असमान या विकृत हों, तो उसे भी पूजा में अर्पित नहीं करना चाहिए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार बेलपत्र कभी अशुद्ध नहीं होता। यदि नया बेलपत्र उपलब्ध न हो तो पहले से भगवान शिव को अर्पित किए गए बेलपत्र को स्वच्छ जल से धोकर पुनः श्रद्धापूर्वक अर्पित किया जा सकता है।
शास्त्रों में बेलपत्र तोड़ने के भी कुछ नियम बताए गए हैं—
बेलपत्र तोड़ने से पहले बेल वृक्ष को प्रणाम कर अनुमति लेना शुभ माना जाता है।
अष्टमी, नवमी, त्रयोदशी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथि पर बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।
एक तिथि समाप्त होकर दूसरी तिथि प्रारंभ होने के संधिकाल में भी बेलपत्र तोड़ना वर्जित माना गया है।
सोमवार के दिन बेलपत्र तोड़ने से बचना चाहिए।
शिव पुराण के अनुसार सावन में भगवान शिव को श्रद्धापूर्वक बेलपत्र अर्पित करने से एक करोड़ कन्यादान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले कालकूट विष का पान करने के बाद भगवान शिव के शरीर में विष का प्रभाव बढ़ने लगा। तब माता पार्वती सहित देवी-देवताओं ने उनका जलाभिषेक किया और बेलपत्र अर्पित किए, जिससे विष का प्रभाव शांत हुआ। तभी से बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है।
धर्माचार्यों के अनुसार भगवान शिव की पूजा में बाहरी आडंबर से अधिक श्रद्धा, भक्ति और शुद्ध भाव का महत्व है। यदि विधि-विधान के साथ उचित बेलपत्र अर्पित कर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप किया जाए, तो सावन मास में भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।







