इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


महान संत और आध्यात्मिक गुरु स्वामी अवधेशानंद जी गिरि अपने प्रवचनों में जीवन को नई दृष्टि से देखने की प्रेरणा देते हैं। उनका मानना है कि नया सोचना, नया बनाना और नई चीजों की खोज करना मानव स्वभाव का मूल गुण है। यही प्रवृत्ति मनुष्य को अन्य प्राणियों से अलग बनाती है और सभ्यता को आगे बढ़ाती है।
स्वामी जी कहते हैं कि जब मनुष्य जड़ सोच में फंस जाता है, तब उसका विकास रुक जाता है। जीवन में प्रगति के लिए जरूरी है कि हम हर दिन कुछ नया सीखें, नई दृष्टि अपनाएं और बदलाव को सहजता से स्वीकार करें। चाहे वह ज्ञान हो, कर्म हो या आध्यात्मिक साधना—नवीनता ही ऊर्जा का स्रोत है।
उनके अनुसार, केवल परंपराओं का अनुसरण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें समझकर समय के अनुसार आत्मसात करना ही सच्ची बुद्धिमत्ता है। नया सोचने वाला व्यक्ति ही समाज को दिशा देता है और समस्याओं के समाधान खोज पाता है।
स्वामी अवधेशानंद जी यह भी कहते हैं कि नया सोचने का अर्थ मूल्यों को त्यागना नहीं, बल्कि सनातन मूल्यों को आधुनिक संदर्भ में जीना है। जब मन सकारात्मक और जिज्ञासु रहता है, तभी जीवन सार्थक बनता है।
उनका यह जीवन सूत्र हमें सिखाता है कि डर, आलस्य और नकारात्मकता से ऊपर उठकर रचनात्मकता और नवाचार को अपनाना ही मानव जीवन की सच्ची पहचान है।
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