इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


सुबह की आरती हो, मंगलवार का व्रत या कोई बड़ा संकट—भारत में सबसे पहले जो नाम होंठों पर आता है, वह है “जय हनुमान।” लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हनुमान जी यह नाम लेकर जन्मे ही नहीं थे। रामायण और पुराणों में उनके कई नामों का उल्लेख मिलता है और हर नाम के पीछे एक अलग कथा, एक अलग संदेश छिपा है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी का जन्म नाम ‘मारुति’ था, क्योंकि वे वायु देव के पुत्र थे। वायु से उत्पन्न होने के कारण उन्हें पवनपुत्र और मारुति कहा गया। वहीं माता अंजना के पुत्र होने के कारण वे आंजनेय कहलाए।
‘हनुमान’ नाम उन्हें बचपन की एक घटना के बाद मिला। कथा के अनुसार, बालक मारुति ने सूर्य को लाल फल समझकर निगलने का प्रयास किया। इंद्र देव ने उन्हें रोकने के लिए वज्र प्रहार किया, जिससे उनके जबड़े (हनु) पर चोट लगी। उसी घटना के बाद उनका नाम पड़ा—हनुमान, यानी उभरे हुए जबड़े वाला।
देवताओं ने बालक हनुमान की शक्ति देखकर उन्हें कई वरदान दिए। इन्हीं वरदानों से वे वज्र जितने शक्तिशाली बने और तभी से उन्हें बजरंगबली कहा जाने लगा। कुछ ग्रंथों में उन्हें शिव का अंशावतार भी माना गया है, जिससे उनका व्यक्तित्व और भी दिव्य हो जाता है।
इस तरह हनुमान जी केवल एक नाम नहीं, बल्कि मारुति, आंजनेय, पवनपुत्र, बजरंगबली और हनुमान—इन सभी नामों का संगम हैं। हर नाम उनकी शक्ति, भक्ति, त्याग और सेवा की एक अलग कहानी कहता है, जो आज भी भक्तों को प्रेरणा देता है।







