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नई दिल्ली: हिंदू परिवारों में बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेना सदियों से चली आ रही परंपरा है। इसे सम्मान, श्रद्धा और आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रतीक माना जाता है। माता-पिता, दादा-दादी या बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर युवा अपने जीवन में सफलता, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
हालांकि, पारंपरिक तौर पर बेटियों को बड़ों के पैर छूने की अनुमति नहीं दी जाती, और इसके पीछे धार्मिक और सांस्कृतिक कारण बताए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बेटियों की शारीरिक पवित्रता और सांस्कृतिक मर्यादा का ध्यान रखते हुए यह नियम रखा गया है। यह परंपरा बेटियों को सम्मान और गरिमा के साथ विकसित करने की सोच से भी जुड़ी है।
धार्मिक शास्त्रों और सामाजिक रीति-रिवाजों में बेटियों के लिए अलग नियम बनाए गए हैं। वहीं बेटियों की भूमिका आशीर्वाद देने वाली भी मानी जाती है। इस दृष्टिकोण के अनुसार, बेटियाँ परिवार में शांति और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती हैं, इसलिए उन्हें पैर छूने की बजाय सम्मानपूर्वक आशीर्वाद देने का महत्व दिया गया है।
आधुनिक समय में परिवारों में यह परंपरा थोड़ी लचीली होती जा रही है। कई घरों में बेटियाँ भी आशीर्वाद लेने के लिए पैर छू सकती हैं, लेकिन यह संस्कार और परंपरा की भावना के साथ किया जाता है।
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