इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


साल 2026 में होली का पर्व एक खास खगोलीय घटना के कारण और भी चर्चा में रहने वाला है. इस बार 3 मार्च 2026, मंगलवार को होलिका दहन के दिन साल का सबसे बड़ा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. ज्योतिष और खगोल विज्ञान—दोनों दृष्टियों से यह ग्रहण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस दौरान चंद्रमा का रंग लाल दिखाई देगा, जिसे आम भाषा में ब्लड मून कहा जाता है.
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चंद्र ग्रहण को मानसिक अशांति, भावनात्मक असंतुलन और नकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है. यही कारण है कि ग्रहण काल में विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है. हालांकि, खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है.
सबसे अहम सवाल यह है कि क्या यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा? ज्योतिषाचार्यों और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, यह ग्रहण मुख्य रूप से अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और कुछ एशियाई देशों में दिखाई देगा, जबकि भारत में यह ग्रहण दृश्य नहीं होगा. इसी कारण भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा.
जहां ग्रहण दिखाई देता है, वहां सूतक काल में पूजा-पाठ, भोजन पकाने और मांगलिक कार्यों से बचने की परंपरा है. वहीं, ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान, जप-तप और दान को शुभ माना जाता है. भारत में दृश्य न होने के कारण होली के उत्सव और धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे.







