इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार 11 अगस्त से एक अत्यंत शुभ और प्रभावशाली योग गजकेसरी योग बनने जा रहा है। यह योग तब बनता है जब चंद्रमा और देवगुरु बृहस्पति (गुरु) एक ही राशि में स्थित होते हैं। इस बार चंद्रमा 11 अगस्त को प्रातः 4:43 बजे कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से गुरु विराजमान हैं। दोनों ग्रहों की युति से बनने वाला यह शुभ योग 13 अगस्त सुबह 6:06 बजे तक प्रभावी रहेगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार गजकेसरी योग बुद्धि, सम्मान, धन, सफलता और शुभ अवसरों का प्रतीक माना जाता है। इस अवधि में कई राशियों के लोगों को करियर, व्यवसाय, शिक्षा और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। विशेष रूप से पांच राशियों के लिए यह समय अत्यंत लाभकारी रहने की संभावना है।
इस शुभ योग के प्रभाव से कई लोगों के लिए आर्थिक उन्नति के रास्ते खुल सकते हैं। रुके हुए कार्य गति पकड़ेंगे और नए अवसर प्राप्त होने की संभावना बनेगी। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है, जबकि व्यापारियों को लाभ और विस्तार के संकेत मिल सकते हैं।
गजकेसरी योग के दौरान पारिवारिक वातावरण सकारात्मक रहने की संभावना है। दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी और परिवार से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। प्रेम संबंधों में भी विश्वास और सामंजस्य मजबूत होगा।
वैदिक ज्योतिष में गजकेसरी योग को सबसे शुभ योगों में से एक माना जाता है। जब चंद्रमा और गुरु एक ही राशि में या परस्पर केंद्र स्थान में होते हैं, तब यह योग बनता है। माना जाता है कि इस योग से व्यक्ति को बुद्धिमत्ता, यश, प्रतिष्ठा, आर्थिक समृद्धि और जीवन में उन्नति प्राप्त होती है।







