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देवघर: 17 फरवरी 2026 को लगने वाले सूर्यग्रहण को लेकर लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं और भ्रम बने हुए हैं. खासकर सूतक काल को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें फैल रही हैं. इन्हीं आशंकाओं को दूर करते हुए देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने स्पष्ट किया है कि इस सूर्यग्रहण का भारत में कोई दृश्य या धार्मिक प्रभाव नहीं रहेगा.
ज्योतिषाचार्य के अनुसार यह सूर्यग्रहण एक आंशिक ग्रहण होगा, जो अर्जेंटीना, चिली, दक्षिण अफ्रीका और अंटार्कटिका जैसे देशों में दिखाई देगा. चूंकि यह ग्रहण भारत में दृष्टिगोचर नहीं होगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार वही ग्रहण धार्मिक रूप से प्रभावी माना जाता है, जो प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे.
पंडित मुदगल ने बताया कि ग्रहण को लेकर अनावश्यक भय या अफवाह फैलाना उचित नहीं है. भारत में रहने वाले श्रद्धालु सामान्य दिनचर्या के अनुसार पूजा-पाठ, भोजन और अन्य कार्य कर सकते हैं. हालांकि, जिन लोगों की व्यक्तिगत आस्था जप-तप या ध्यान में है, वे अपनी इच्छा से भगवान का स्मरण कर सकते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि ग्रहण एक खगोलीय घटना है और विज्ञान व ज्योतिष—दोनों का अपना महत्व है. जरूरत इस बात की है कि लोग सही जानकारी पर भरोसा करें, न कि सोशल मीडिया पर फैल रही अप्रमाणित बातों पर.







