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30 सप्ताह के गर्भपात पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला — महिला की प्रजनन स्वायत्तता सर्वोपरि, बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश पलटा

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में 30 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति देते हुए कहा है कि महिला की प्रजनन स्वायत्तता और उसकी इच्छा सर्वोपरि है। कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के पहले दिए गए फैसले को पलटते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध मां बनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट और महिला की शारीरिक-मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि संविधान महिलाओं को अपने शरीर और जीवन से जुड़े फैसले लेने का अधिकार देता है और इस अधिकार का सम्मान होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी माना कि गर्भावस्था से जुड़ा निर्णय केवल कानूनी नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा का भी विषय है।सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था का उद्देश्य महिला की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना है, न कि उसे मानसिक और सामाजिक दबाव में डालना।इस फैसले को महिलाओं के अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में प्रजनन अधिकारों से जुड़े मामलों के लिए एक अहम मिसाल बन सकता है।

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