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Holika Dahan 2026: ब्रह्मा के वरदान के बाद भी क्यों जली होलिका? प्रह्लाद कैसे बचे अग्नि से

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

Holika Dahan 2026 के अवसर पर भक्त प्रह्लाद और होलिका की कथा एक बार फिर सुनाई जाएगी। यह कथा आस्था, अहंकार और ईश्वर-भक्ति की शक्ति को दर्शाती है।

पुराणों के अनुसार, असुरराज हिरण्यकशिपु ने कठोर तप कर ब्रह्मा से वरदान पाया था कि वह किसी भी देव, दानव या मनुष्य द्वारा न मारा जाए। उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था, जो हिरण्यकशिपु को स्वीकार नहीं था।

कथा के अनुसार, हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। योजना बनाई गई कि होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठेगी, जिससे प्रह्लाद जल जाए और वह सुरक्षित रहे। लेकिन वरदान का प्रभाव तभी तक था, जब होलिका स्वयं अकेली अग्नि में प्रवेश करे। उसने छलपूर्वक उस शक्ति का दुरुपयोग किया।

कहते हैं कि ईश्वर की कृपा से तेज हवा चली, अग्नि से बचाने वाली दिव्य चादर प्रह्लाद पर आ गई और होलिका जलकर भस्म हो गई। प्रह्लाद की अटूट भक्ति ने उन्हें सुरक्षित रखा।

यह कथा सिखाती है कि अहंकार और अधर्म अंततः नष्ट होते हैं, जबकि सच्ची भक्ति और विश्वास की हमेशा जीत होती है। यही कारण है कि होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

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