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India china talk: ड्रैगन आज पीछे नहीं हटा तो चुकानी पड़ेगी भारी कीमत!

vinay motiani2 मिनट में पढ़ें

आज की दिल्ली।:

नई दिल्ली

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पिछले एक महीने की तनातनी खत्म करने के लिए आज भारत और चीन की सेना के बीच कोर कमांडर स्तर की मीटिंग होने जा रही है। इस मीटिंग में गलवान एरिया, पैंगोग त्सो और गोगरा एरिया पर चर्चा होने की उम्मीद है और एलएसी पर मई से पहले की तरह स्थिति बहाल करने पर जोर दिया जाएगा। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से चीन जिस तरह आग उगल रहा है, उससे इस बैठक के नतीजे को लेकर कई सवाल पैदा होने लगे हैं। इससे यह भी आशंका पैदा होने लगी है कि क्या इस मीटिंग का हश्र भी पिछली बैठकों की तरह ही तो नहीं होगा? हालांकि, यदि चीन ऐसा करता है तो उसकी बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ सकती है।



क्या चीन झेल पाएगा बाकी मुल्कों का दबाव?

इस बैठक पर अमेरिका, रूस जैसे ताकतवर मुल्कों के अलावा चीन और भारत के पड़ोसी देशों की भी नजर टिकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही मध्यस्थता की पेशकश कर चुके हैं। हालांकि, चीन ने इस प्रस्ताव को नकार दिया है। इसके बावजूद अमेरिका की खास नजर होगी। चीन भी नहीं चाहेगा कि अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर के कारण पहले ही उसकी इकॉनमी को सेंध लग चुकी है। कोरोना ने इसे जबर्दस्त चोट पहुंचाई है। ऐसे में किसी भी कीमत पर इस मीटिंग से चीन यह संदेश देना चाहेगा कि वह पड़ोसी मुल्कों के साथ दोस्ती और शांति को लेकर प्रतिबद्ध है।



भारत-ऑस्ट्रेलिया की दोस्ती से चीन को दर्द

हाल के दिनों में भारत और ऑस्ट्रेलिया की बीच दोस्ती ने चीन की चिंता बढ़ा दी है। खासकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया प्रधानमंत्री कॉट मॉरिसन के बीच व्यक्तिगत तौर पर भी अच्छे रिश्ते हैं। हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को नाकाम करने के लिए भारत और ऑस्‍ट्रेलिया ने एक-दूसरे के सैन्‍य अड्डों के इस्‍तेमाल का अहम समझौता भी किया है।

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