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Mount of Jupiter: हस्तरेखा में गुरु पर्वत का क्या है महत्व? जानिए किस्मत से जुड़े संकेत

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

हस्तरेखा शास्त्र में हथेली के उभरे हुए भागों को ‘पर्वत’ कहा जाता है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है गुरु पर्वत, जो तर्जनी (इंडेक्स फिंगर) के नीचे स्थित होता है। ज्योतिष में गुरु को ज्ञान, नेतृत्व, धर्म और समृद्धि का कारक माना गया है, इसलिए हथेली में इसका मजबूत या कमजोर होना जीवन की दिशा तय करने वाला संकेत माना जाता है।

अगर गुरु पर्वत उभरा हुआ, साफ और गुलाबी आभा लिए हो तो इसे बेहद शुभ माना जाता है। ऐसे व्यक्ति में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, आध्यात्मिक झुकाव और समाज में सम्मान पाने की प्रवृत्ति होती है। यह संकेत देता है कि व्यक्ति शिक्षा, प्रशासन, राजनीति या धार्मिक क्षेत्र में सफलता पा सकता है।

यदि यह भाग सपाट, दबा हुआ या उस पर क्रॉस/कट के निशान हों, तो इसे कमजोर गुरु का संकेत माना जाता है। ऐसे व्यक्ति को निर्णय लेने में कठिनाई, आत्मविश्वास की कमी या करियर में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है।

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