इस शिव मंदिर में प्रकृति करती है 24 घंटे जलाभिषेक, सालभर नहीं रुकती जलधारा, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़


इस साल की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ रही है। इसे फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन विशेष रूप से गणेश जी की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देना अनिवार्य होता है। चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना व्रत पूरा नहीं माना जाता।
विशेष बात यह है कि इस बार द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर सुकर्मा योग बन रहा है, जो अत्यंत शुभ योग माना जाता है। इस योग में किए गए पूजा और व्रत से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
दृक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी तिथि 5 फरवरी, 2026, गुरुवार को सुबह 12:09 बजे से प्रारंभ होगी और 6 फरवरी, 2026, शुक्रवार को रात 12:22 बजे तक रहेगी। व्रत का पालन 5 फरवरी, गुरुवार को किया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु प्रातः गणेश जी की पूजा करेंगे और संध्या में चंद्रमा को अर्घ्य देंगे।
संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष रूप से संकटों से मुक्ति, जीवन में सुख-शांति और बुद्धि व स्वास्थ्य में वृद्धि के लिए किया जाता है। इस अवसर पर भक्त उपवास रखते हैं और मंत्र जाप के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।







